आपके जज़्बात को जुबां देंगी ये शायरी

 अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ 

अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो जाता हूँ 

- अनवर शऊर 

एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें 
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं 

- फ़िराक़ गोरखपुरी 

नहीं आती तो याद उन की महीनों तक नहीं आती 
मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं 

- हसरत मोहानी 

उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो 
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है 

- राहत इंदौरी


तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं 
किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं 

- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 


आप के बाद हर घड़ी हम ने 
आप के साथ ही गुज़ारी है 

- गुलज़ार 


तुम ने किया न याद कभी भूल कर हमें 
हम ने तुम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया 

- बहादुर शाह ज़फ़र 


चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है 
हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है 

- हसरत मोहानी 


कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब 
आज तुम याद बे-हिसाब आए 

- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 


उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो 
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए 

- बशीर बद्र 

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