यूं ही चलती रहेंगी ये दुनियां ,, हम ना होंगे तो कोई हमसा होगा.....
मशवरा करके लिया होता तो सस्ता पड़ता
यहाँ वहाँ है ज़माने को अब तलाश मेरी..
मेरे वजूद के अंदर परी है लाश मेरी.!!
कतराने लगा है अब, सवालों से दिल,
ना जाने जवाब किसका, घाव कर जाए
तेरी चाहत में रुसवा यूँ सरे बाजार हो गए.🖤
हमने ही दिल खोया और हम ही गुनहगार हो गए.💔
ज़माना सारा चाहे मेरी जितनी गजले पढ़े
वो एक शख़्स जो,ना पढे तो लिखना फिजूल है...!!
तुम मिले तो हो
पर बहुत देर से
मेरी कहानी अंतिम चरण पर है
और तुम
आखिरी पन्ने का पहला शब्द बनकर आए हो!
आज फिर घर में तेरा जिक्र हुआ...!!!🤷
आज फिर में बिना कुछ खाये ही सो गया...!!!😢💔
तुम पे मरने से लाख बेहतर ही था...!!!🤷
हम किसी हादसे में मर जाते..!!💔
हमने सूरज की रोशनी मे भी कभी अदब नहीं खोया,
कुछ लोग जुगनुओं की चमक में मग़रूर हो गये..
मैं मेरे घर की आखरी उम्मीद हूँ
वरना मैं तुम्हें बताता मोहब्बत मैं जान कैसे देते हैं ❣️
जरा सी आहट पे जाग जाता है वो रातो को,
ऐ खुदा गरीब को बेटी दे तो दरवाज़ा भी दे।।
लगाव कैसा भी हो ..
बाद में दर्द ही देता है ...
थोड़ी सी खुद्दारी भी तो लाज़िम थी,
उसने हांथ छुड़ाया हमने छोड़ दिया..!।
वो एक शख्स जो मेरा हुआ नहीं
फिर मै किसी का हुआ नहीं
मैं तो उससे झगड़ने गई थी.....
उसने चाय का पूछकर पूरा मामला ही पलट दिया
जी भर के सताया आपने हमें साहिब
अब आप भी बोलेंगे नया साल मुबारक
वक्त के साथ तेरी आदत भी छूट जाएगी ,
कुछ तुम भूल जाओगे कुछ हमें भी याद कम आएगी..
वो पहले सिर्फ मेरी आँख में समाया था,
फ़िर एक रोज़ रगों तक उतर गया मुझ में!!
ये अपने अपने मुक़द्दर की बात है यारा
में उसमे सिमटा रहा, वो बिखर गया मुझ में!!
ग़म के मारो का कहां हाल अलग होता है,
हम वही होते हैं बस साल अलग होता है।
कोई हंस हंस के फसाता है कोई रो रो के
हर शिकारी का यहां जाल अलग होता है।
"मुझे ना बताइये "इश्क़" की तहज़ीब.,
मैंने एक उम्र उसे बस दूर से देखा है.. 🖤
कभी किसी ने,
थोड़ा सा वक्त दिया था हमें,
हमने उसे इश्क समझ कर,
आज भी सम्भाल कर रखा है।
मैं चाहू तो आज ही मना लू तुम्हे
मगर तूम वो रहे ही नहीं जिसकी तलब थी मुझे
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